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जनता किससे खफ़ा, CAA से या पीएम मोदी से?

By RNI Hindi Desk 
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{ स्वतंत्र पत्रकार प्रणव गोस्वामी की कलम से }

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन इसकी शुरूआत पूर्वोत्तर के राज्यों से हुई थी, जिसके बाद अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से होते हुए दिल्ली के जेएनयू और फिर जामिया तक पहुंची जिसके बाद जमकर बवाल हुए। लेकिन पिछले एक महीने से देश की राजधानी दिल्ली में जामिया इलाके के शाहीन बाग में सड़क को पूरी तरह से जाम करके CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में विपक्षी दलों के तमाम नेताओं ने शिरकत की है जो यह बताने के लिए काफी है कि इन प्रदर्शनकारियों को विपक्ष के नेताओं का समर्थन प्राप्त है। क्योंकि शशि थरूर से लेकर मणिशंकर अय्यर और दूसरे लेफ्ट के नेताओं ने इस आंदोलन में आग में घी डालने का काम किया है।

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स्वतंत्र पत्रकार प्रणव गोस्वामी

तो दूसरी तरफ बॉलीवुड में भी CAA को लेकर दो फाड़ है। क्योंकि सिने जगत से भी कई एक्टर, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर और गीतकारों ने CAA का विरोध किया है और देशभर में CAA के खिलाफ होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में शिरकत कर उनका समर्थन किया है। लेकिन इसके साथ-साथ इन विरोधियों को देश के कई गणमान्य बुद्धिजीवी लेखकों और पत्रकारों ने भी लोगों को CAA को लेकर गुमराह करने का काम किया है। यही वजह है कि देश के अल्पसंख्यक समुदाय में यह डर पैदा हो गया है कि CAA कानून उनके खिलाफ है और केंद्र की सरकार उन्हें देश से निकाल देगी।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन तथाकथित बुद्धिजीवियों ने कभी भी CAA का विरोध करने वालों को यह नहीं बताया कि नागरिकता संशोधन कानून उनके खिलाफ नहीं है। यह कानून किसी की भी नागरिकता नहीं लेगा, बल्कि यह नागरिकता देने वाला कानून है। क्योंकि CAA का विरोध करने वाले ज्यादातर प्रदर्शनकारियों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में जानकारी नहीं है।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस कानून में क्या है, जिसे लेकर इतना विवाद है। आपको बता दें कि इस कानून के मुताबिक, पड़ोसी देशों से शरण लेने के लिए भारत आए हिंदू, जैन, बैद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। सही मायने में अगर देखा जाय तो इस कानून से उनलोगों को फायदा मिलेगा जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं। यह वो अल्पसंख्यक हैं जो वहां के लोगों द्वारा सताए गए हैं। हलांकि इस कानून के बनने से पहले इसके बिल को लेकर विपक्ष बेहद कड़ा रूख अख्तियार किया था और इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया था।

आपको बता दें कि पूर्वोत्तर के राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर लगातार विरोध होता रहा है। इन राज्यों में विरोध इस बात को लेकर है कि यहां कथित तौर पर पड़ोसी देश बांग्लादेश से भारी संख्या में मुसलमान और हिंदू अवैध तरीके से आकर बसे हैं। लेकिन इस बात का विरोध है कि वर्तमान सरकार हिंदू मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की फिराक में प्रवासी हिंदूओं के लिए भारत की नागरिकता देकर यहां बसाना चाहती है।

NRC और CAA में क्या है फर्क?

पहले बात CAA की  

नागरिकता संशोधन कानून एक ऐसा कानून है जिसके तहत हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए लोगों को भारत की नागरिकता देना है। इसमें पड़ोसी देशों से आए हिंदूओं, सिखों, ईसाईयों, बौद्ध और पारसी लोग शामिल हैं। इस कानून में ऐसा कहीं भी नहीं है कि, भारत में रहने वाले मुसलमानों या फिर दूसरे समुदायों को बाहर करना है। कई मौकों पर देश के पीएम और गृहमंत्री ने भी CAA को लेकर अपना रूख स्पष्ट किया है। लेकिन बावजूद इसके देश के कुछ राजनीतिक दल और बुद्धिजीवी इसे लेकर अल्पसंख्यकों में भ्रम फैला रहे हैं।

अब बात NRC की

NRC यानी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यह बताता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। जिनलोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं है वह अवैध नागरिक कहलाए जाएंगे। NRC बेसिकली असम के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से असम में लागू किया गया था। इसके मुताबिक 25 मार्च 1971 के पहले असम में रह रहे लोगों को भारत का नागरिक माना गया है। इसके तहत पिछले अगस्त महीने में असम का नागरिक रजिस्टर जारी किया गया था। जिसमें करीब 19 लाख लोगों के नाम इस रजिस्टर से बाहर है। उन्हें वैध प्रमाण पत्र के साथ अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। NRC को अभी पूरे देश में लागू नहीं किया गया है।


CAA को लेकर पीएम का विरोध क्यों?

बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी की बदौलत केंद्र की सत्ता में लगातार दूसरी बार भारी बहुमत से लौटी है। देशभर के लोगों को पीएम मोदी से काफी उम्मीदें है। केंद्र की सत्ता संभालते ही पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर से 370 और 35A को समाप्त कर दिया और उसे तीन केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बांट दिया। पुलवामा और उड़ी को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़े एक्शन लेना उनपर जवाबी कार्रवाई करना। यह लोगों में कहीं ना कहीं संदेश गया है कि केंद्र की मौजूदा सरकार एक्शन लेने वाली है। ये सारी बातें विपक्षियों और उनके विरोधियों को कही ना कहीं खलती है। यही वजह है कि ये सभी एकजुट होकर पीएम मोदी के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

पीएम मोदी के विरोधियों के सामने कोई मुद्दा नहीं है यही वजह है कि उन्होंने CAA को अपना हथियार बना लिया है और उसे लेकर मोदी के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होकर विपक्ष ये जताना चाहती है कि वह उसके साथ है जबकि केंद्र की मोदी सरकार उनके खिलाफ काम कर रही है और यह कानून भी उनके खिलाफ है। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई रैलियों में साफ कह चुके हैं कि, अगर आपको मेरा विरोध करना है तो आप कीजिए, लेकिन CAA आपके खिलाफ नहीं है और ना ही यह आपका अधिकार छीनेगा।

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