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आयरन लेडी का शानदार सफर

By RNI Hindi Desk 
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आयरन लेडी के नाम से मशहूर भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोकप्रियता के चर्चे सिर्फ देश में हीं नहीं विदेशों में भी था। वो एक तेज तर्रार और निर्णायक फैसले लेने वाली महिला थी। वो साल 1966 से लेकर 1977 तक लगातार तीन बार भारत की प्रधानमंत्री रहीं लेकिन चौथी बार प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए 1984 में उनकी हत्या कर दी गई। लेकिन इंदिरा गांधी के कुछ काम ऐसे रहे हैं जिन्हें देश सदैव याद करता रहेगा।     

इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को नेहरू परिवार में हुआ था। अपनी स्कूली परीक्षा पूरी करने के बाद इंदिरा ने शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहीं पर रविंद्रनाथ टैगोर ने इंदिरा का नाम प्रियदर्शिनी रखा। यहां की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंदिरा इंग्लैंड चली गईं। ऑक्सफोर्ड से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 1941 में वह भारत वापस लौटी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गई। लेकिन 1964 में अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया गया। इसके बाद वो लालबहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं।

सन् 1966 में इंदिरा गांधी इस देश की प्रधानमंत्री बनीं जिसके बाद उन्होंने कई सुधारों पर काम किया। जिनमें बैंकों का राष्ट्रीयकरण, दूसरा, राजा- रजवाड़ों के प्रिवीपर्स की समाप्ति और तीसरा पाकिस्तान को युद्ध में पराजित कर बांग्लादेश का उदय करना। इसके साथ ही पोखरण में पहला परमाणु विस्फोट करना ये वो काम है जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण

1969 में इंदिरा गांधी ने देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। यह वो वक्त था जब कांग्रेस दो गुटों में बंटी हुई थी, इंडिकेट और सिंडिकेट। इंडिकेट की नेता स्वयं इंदिरा गांधी थी जबकि सिंडिकेट के लीडर थे के. कामराज। इंदिरा गांधी पर सिंडिकेट का दवाब बढ़ रहा था। इंदिरा गांधी का कहना था कि, बैंकों के राष्ट्रीयकरण की बदौलत ही देशभर में बैंक क्रेडिट दी जा सकेगी। उस वक्त मोरारजी देसाई वित्तमंत्री थे और वे इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर चुके थे। जिसके बाद 19 जुलाई 1969 को एक अध्यादेश लाया गया औऱ 14 बैंकों का स्वामित्व राज्य के हवाले कर दिया गया। उस वक्त इन बैंकों के पास देश की 70 फीसदी जमापूंजी थी। राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों की 40 फीसदी पूंजी को प्राइमरी सेक्टर में निवेश के लिए रखा गया था। देशभर के ग्रामीण इलाकों में बैंकों की शाखाएं खुल गईं। 1969 में देशभर में 8 हजार 261 शाखाएं थी।

राजे- रजवाड़ों की समाप्ति

1967 के आम चुनावों में कई पूर्व राजे- रजवाड़ों ने सी. राजगोपालाचारी के नेतृत्व में स्वतंत्र पार्टी का गठन कर लिया था। इंदिरा गांधी ने प्रिवीपर्स को समाप्त करने का संकल्प ले लिया औऱ 23 जून 1967 को ऑल इंडिया कांग्रेस ने प्रिवीपर्स की समाप्ति का प्रस्ताव पारित कर दिया। जिसके बाद 1970 में संविधान में 24वां संशोधन किया गया और लोकसभा में 332- 154 वोट से इसे पारित करवा लिया गया। हलांकि राज्यसभा में यह प्रस्ताव 149-75 से पराजित हो गया। राज्यसभा में हारने के बाद इंदिरा गांधी ने तब के राष्ट्रपति वीवी गिरी से सारे राजे- महाराजाओं की मान्यता समाप्त करने को कहा। इस बीच 1971 में चुनाव हो गए और इंदिरा गांधी को जबर्दस्त सफलता मिली। उन्होंने संविधान में संशोधन कर प्रिवीपर्स की समाप्ति कर दी, इस तरह देशभर के राजे-महाराजे के सारे अधिकार और सहूलियतें वापस ले ली गई।

बांग्लादेश का उदय

देश की आजादी से पहले अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन धार्मिक आधार पर कर दिये थे। हिंदू बंगालियों के लिए पश्चिम बंगाल और मुस्लिम बंगालियों के लिए पूर्वी बंगाल बना दिए थे। लेकिन पूर्वी बंगाल की जनता पाकिस्तान की सेना के शासन से घुटन महसूस कर रही थी। उनके पास नागरिक अधिकार नहीं थे। जिसके बाद शेख मुजीबुर रहमान की अगुआई में मुक्ति वाहिनी ने पाकिस्तान की सेना के साथ गृहयुद्ध शुरू कर दिया। इस गृहयुद्ध के कारण भारत के असम में करीब 10 लाख बांग्ला शरणार्थी पहुंच गए जिससे देश में आंतरिक और आर्थिक संकट पैदा हो गया। जिसके बाद भारत की सेना ने मुक्तिवाहिनी के साथ मिलकर पाकिस्तान की 90,000 सैनिकों वाली सेना को परास्त कर दिया और 16 दिसंबर को भारतीय सेना ढाका पहुंच गई। पाकिस्तान की फौज को आत्मसमर्पण करना पड़ा। इसी के साथ विश्व के मानचित्र पर एक नए देश बांग्लादेश का उदय हुआ।

देश में आपातकाल

दरअसल 1971 में हाईकोर्ट ने रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध ठहरा दिया, इस चुनाव में राजनारायण कुछ मतों से हार गए थे। जिसके बाद इंदिरा गांधी ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जिसपर उन्हें स्टे तो मिल गया। वे प्रधानमंत्री पद पर बनीं रह सकती थी लेकिन सदन की कार्यवाई में भाग नहीं ले सकती थी और ना ही सदन को वोट कर सकती थी। इसी के मद्देनजर इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल लगा दिया था। लेकिन देश की जनता ने इसका माकूल जबाव दिया और 1977 के चुनावों में इंदिरा गांधी की हार हुई।

पहला परमाणु विस्फोट

1974 में इंदिरा गांधी ने पूरी दुनिया के विकसित देशों को दरकिनार कर पोखरण में पहला परमाणु विस्फोट किया तो दुनिया दंग रह गई। दक्षिण एशिया में इंदिरा के नेतृत्व में एक ऐसी शक्ति का उदय हुआ था जिसकी ओर कोई आंख उठाकर नहीं देख सकता था। उस वक्त इंदिरा गांधी देशभक्ति की एक पर्याय बन गई थी। इसके बाद सरकार गंवाने और फिर बनाने के बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार तक जाती है। इस ऑपरेशन के बाद इंदिरा गांधी को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी। इंदिरा गांधी ने भारत में न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक परिवर्तन किए थे। आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया भी उनके मजबूत इरादे का लोहा मानती है।

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