{ श्री अचल सागर जी महाराज की कलम से }
पूरी मानव जाति यह जानती है कि आज परम् पिता का ओहदा मानव ने ले लिया है। कलियुग में जिसके पास धन संपत्ति है वही अपने आप को ईश्वर समझ बैठता है।
आज कल देखा जाता है की कई देशों के पास ऐसे घातक हथियार है जो किसी भी देश को खत्म कर सकते है तो वो देश मनमानी पर उतर आते है।
इसी तरह मानव के पास भी जब औरों से अधिक शक्ति आ जाती है तो वो अपने पास को सर्व शक्तिमान समझने की भूल करता है।
वो लोगो पर अत्याचार करता है। अपने खुद के कानून बना देता है वही लोगों के द्वारा उन कानून का पालन ना होने पर उन्हें सजा देने का एलान करता है।
लेकिन ऊपर वाले का अपना इन्साफ है। एक कोरोना नाम की बीमारी ने देशों को तहस नहस कर दिया हैं। सामूहिक लाशे दफनाई जा रही है।
आपने आप को सर्व शक्तिमान समझने वाला इंसान आज एक दवाई के लिए तरस गया है। लोंगो को कोई मरने से नहीं बचा पा रहा। अब इंसान का घमंड कहा है ?
दरअसल कभी भी अपने आप को ईश्वर से बड़ा नहीं समझना चाहिए ना ही दौलत का घमंड करना चाहिए। उसे जाने में एक पल की देरी नहीं लगती है।