Home देश शिवाजी पार्क बनेगा महाराष्ट्र में नए राजनीतिक युग का गवाह।

शिवाजी पार्क बनेगा महाराष्ट्र में नए राजनीतिक युग का गवाह।

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sharad pawar and uddhav thackeray attacks on bjp

महाराष्ट्र की ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आज शाम 7 बजे एक नया इतिहास रचा जाएगा। इस ऐतिहासिक मैदान में मराठा राजनीति में एक दूसरे के कट्टर विरोधी मानें जाने वाली शिवसेना और कांग्रेस- एनसीपी के बीच गठबंधन के बाद शाम 7 बजे उद्धव समेत तीनों ही पार्टियों से 2-2 नेता आज ही शपथ लेंगे। लेकिन सबकी नजरें अजित पवार को लेकर है कि पार्टी उन्हें क्या भूमिका देने वाली है।

गठबंधन में तीनों ही पार्टियों के बीच काफी चर्चाओं के बाद ये तय हुआ कि, एक डेप्युटी सीएम होगा जो एनसीपी के कोटे में गया है। जबकि कांग्रेस के खाते में स्पीकर का अहम पद गया है। इससे पहले ऐसी अटकलें थी कि, एनसीपी और कांग्रेस दोनों से एक-एक डेप्युटी सीएम होगा और दोनों ही दल स्पीकर पर दावा ठोक रहे थे।

उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे इसके साथ– साथ सिर्फ मंत्री पद की शपथ 5 लोगों के लेने की संभावना है। दरअसल शिवसेना, कांग्रेस औऱ एनसीपी से 2-2 नेताओं के शपथ लेने का प्लान है। बाकि मंत्री प्लोर टेस्ट के बाद शपथ लेंगे। ऐसी खबरें हैं कि शिवसेना की तरफ से आज उद्धव ठाकरे के साथ सिर्फ एक ही नेता शपथ लेंगे और वह एकनाथ शिंदे हो सकते हैं। जबकि एनसीपी की तरफ से जयंत पाटील, छगन भुजबल, दिलीप वलसे और अजित पवार के नाम की चर्चा है। वहीं कांग्रेस की तरफ से कैबिनेट मंत्री के लिए बालासाहेब थोराट के नाम की संभावना जताई जा रही है।

वैसे गठबंधन के बीच जो फॉर्म्युला तय हुआ है उसके मुताबिक डेप्युटी सीएम का पोस्ट एनसीपी के खाते में गया है ऐसे में यह देखना दिलचस्प है कि नई सरकार में अजित पवार की भूमिका क्या होगी। क्योंकि अजित पवार एनसीपी से बगावत कर सुर्खियों में थे। देवेंद्र फडणवीस के साथ डेप्युटी सीएम की शपथ लेने के बाद इस्तीफा देकर अजित वापस एनसीपी में आ गए। इसके लिए परिवार के लोगों ने अजित को काफी समझाया था। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि, डेप्युटी सीएम पर फैसला एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ही लेंगे।

अगर शिवसेना की बात करें तो पहली सालों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए उद्धव ठाकरे ने अपने बेटे आदित्य को चुनावी मैदान में उतारा था। वर्ली से आदित्य चुनाव जीत भी गए। इसी के बाद शिवसेना ने आदित्य को बतौर सीएम प्रॉजेक्ट करने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियां बदलने के कारण उद्धव ठाकरे को सीएम का पद स्वीकार करना पड़ा, जिसके लिए वो पहले से तैयार नहीं थे। अब ये भी सवाल है कि सरकार में उद्धव ठाकरे के बाद आदित्य ठाकरे की भूमिका क्या होगी, जिसे लेकर काफी दिलचस्पी है।

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