Home उत्तराखंड पंच पूजाओं के साथ शुरू हुई बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया !

पंच पूजाओं के साथ शुरू हुई बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया !

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badrinath closing ceremony

देश के प्रमुख चारधाम में से एक बदरीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया पंच पूजाओं के साथ आज से शुरू हो गई है, आपको बता दें कि ये प्रक्रिया हर वर्ष अक्टूबर नवम्बर के महीने में होती है, जो छह माह के शीतकाल के बाद अप्रैल- मई में फिर खुलेंगे। कपाट बंद करने की प्रक्रिया तीन दिन तक चलती है जिसकी शुरूआत गणेश पूजा के साथ होती है।

कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बदरीनाथ धाम में श्रद्धालु तप्तकुंड में स्नान करने के बाद भगवान बदरीनाथ के दर्शन करते हैं। कुंड में स्नान का अपने में एक विशेष महत्व होता है।

आज गणेश पूजा के साथ ही शाम को गणेश जी के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। दूसरे दिन आदि केदारेश्वर के कपाट बंद होंगे और फिर 15 नवंबर को खडग, पुस्तक पूजन के साथ ही वेद ऋचाओं का पाठ बंद होगा।

16 नवंबर को महालक्ष्मी पूजन के दिन रावल भगवान की सखी का वेश धारण कर मां लक्ष्मी को भगवान नारायण के साथ गर्भ गृह में आने का न्योता देंगे। 17 नवंबर को बद्रीविशाल को घृत कंबल ओढ़ने के साथ ही शाम 5 बजकर 13 मिनट पर भगवान बदरीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

कपाट बंद होते समय द्वारा भगवान बद्रीविशाल को माणा गांव से गृत अर्पित घृत कंबल ओढ़ाया जाता है माना जाता है कि भगवान को सर्दी से बचाने के लिए इस धार्मिक परंपरा को हर वर्ष मनाया जाता है

कपाट बंद करने के साथ ही योगध्यान बद्री मंदिर में पांडुकेश्वर और नृसिंह मंदिर जोशीमठ में भगवान बद्रीविशाल की शीतकालीन पूजाऐं की जाती है। कपाट बंद होने से पूर्व पंच पूजाओं का विशेष महत्व होता है। इस अवसर पर भक्तों का सैलाब देखने वाला होता है

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