Home देश अजित पवार के मन को पढ़ने में कैसे चूक गए शरद पवार?

अजित पवार के मन को पढ़ने में कैसे चूक गए शरद पवार?

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पूरे देश की नजरें इस वक्त महाराष्ट्र की राजनीति में हो रहे ड्रामें पर है। इस हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामें के केंद्र में राजनीति के दिग्गज शरद पवार हैं। अपने भतीजे की बगावत के बाद सकते में आए शरद पवार डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। फिलहाल शरद पवार का पलड़ा भारी है। जबकि जूनियर पवार अलग-थलग दिख रहे हैं। लेकिन यह नौबत क्यों आई? क्यों अजित पवार ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया? क्या इसकी भनक शरद पवार को थी? क्या इनके पास बहुमत साबित करने के लिए जरूरी विधायक हैं? जैसे तमाम सवाल है जो राजनीतिक गलियारे में गूंज रही है।

दरअसल 17 नवंबर को पुणे में शरद पवार के घर पर एनसीपी की बैठक हुई थी औऱ इस बैठक में अजित पवार ने काफी हद तक अपने भविष्य को लेकर संकेत दे दिए थे। बैठक में अजित पवार ने यह कहकर चौंका दिया था कि एनसीपी को शिवसेना और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बजाय अगली सरकार बनाने के लिए बीजेपी की मदद करनी चाहिए। लेकिन उनके इस प्रस्ताव को उस वक्त ठुकरा दिया गया था क्योंकि तब एनसीपी, शिवसेना औऱ कांग्रेस के बीच बातचीत आखिरी चरण में पहुंच चुकी थी।

उस वक्त अजित पवार के इस सुझाव को भले ही तमाम नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया था लेकिन वह इस खतरे को भांपने में नाकाम हो गए। लेकिन समय के साथ ही अजित पवार ने बगावत कर शरद पवार को चौंका दिया। अब सवाल यह उठता है कि पुणे की बैठक में अजित पवार के मन में क्या चल रहा था पार्टी का कोई भी नेता उनके इस संकेतों को क्यों नहीं पढ़ पाया।

इस बैठक के बाद अजित पवार ने अपने भरोसेमंद विधायकों को साधने में जुट गए। एनसीपी के जिन विधायकों से उन्होंने संपर्क किया उससे उन्होंने सिर्फ एक ही सवाल पूछा कि अगर वो कोई बड़ा कदम उठएंगे तो क्या मैं आपको अपने साथ गिन सकता हूं? लेकिन उन्होंने किसी से भी इसका खुलासा नहीं किया कि वो क्या करने वाले हैं। दूसरी तरफ अजित पवार शिवसेना के साथ लगातार हो रही बैठकों में भी शामिल रहे और हर अपडेट पर नजर रख रहे थे।

शुक्रवार को भी अजित पवार नेहरू सेंटर में चल रही बैठक को अचानक ही बीच में छोड़कर चले गए थे। इस बैठक के बाद ही शरद पवार ने एलान किया था कि शिवसेना का मुख्यमंत्री अगले 5 साल के लिए सीएम होगा। इसके बाद ही अजित पवार ने अपने विश्वासपात्रों विधायकों को एक बार फोन किया और कहा कि ढाई-ढाई साल के लिए सीएम के लिए अब समझौता हो रहा है लिहाजा अब एक्शन का वक्त है।

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